
बस्ती: कुदरहा PHC या पैथोलॉजी संचालकों का दफ्तर? डॉक्टर के चैंबर से मरीजों की जान तक ‘दलालों का कब्जा’
कुदरहा अस्पताल में फर्जी जांच का 'खेल': डॉक्टर के पर्चे पर दलालों की छीना-झपटी, मरीजों की जान जोखिम में; PHC कुदरहा में 'लिफाफा संस्कृति' का बोलबाला? अवैध पैथोलॉजी संचालकों पर कार्रवाई से क्यों कांप रहे अधीक्षक के हाथ?
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: पीएचसी कुदरहा बना अवैध पैथोलॉजी संचालकों का ‘अड्डा’, मरीजों की जान से खिलवाड़ और विभाग की चुप्पी
बस्ती: सरकारी अस्पताल बना अवैध पैथोलॉजी का अड्डा, नौसिखिए कर रहे खून की जांच!
बस्ती: स्वास्थ्य विभाग की बदहाली और भ्रष्टाचार की परतें एक बार फिर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) कुदरहा में खुलती नजर आ रही हैं। सरकारी अस्पताल का प्रांगण, जहाँ मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं और इलाज मिलना चाहिए था, वहाँ अब अवैध पैथोलॉजी और डायग्नॉस्टिक सेंटरों के दलालों का कब्जा है। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल परिसर के भीतर मरीजों की जान के साथ खुलेआम खिलवाड़ हो रहा है और जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ देखकर भी अनजान बने हुए हैं।
डॉक्टर के केबिन से लेकर कैंपस तक ‘दलालों का बोलबाला’
कुदरहा पीएचसी की व्यवस्था इतनी लचर हो चुकी है कि यहाँ आने वाले मरीजों को डॉक्टर से ज्यादा इन अवैध पैथोलॉजी सेंटरों के नुमाइंदों का सामना करना पड़ता है। अस्पताल के अंदर आधा दर्जन से अधिक संदिग्ध पैथोलॉजी संचालक डॉक्टर के केबिन के बाहर पहरा देते नजर आते हैं। स्थिति यह है कि जैसे ही डॉक्टर मरीज की पर्ची पर जांच लिखते हैं, वहां तैनात दलाल आपस में ही पर्ची छीनने की होड़ में लग जाते हैं।
नौसिखिए कर रहे ब्लड सैंपलिंग, फर्जी रिपोर्ट का खेल
सबसे गंभीर और चिंताजनक पहलू यह है कि इन अवैध सेंटरों के ‘नौसिखिए’ कर्मचारी अस्पताल परिसर में ही खुलेआम मरीजों का ब्लड सैंपल ले रहे हैं। बिना किसी मानक और डिग्री के, ये लोग न केवल मरीजों के स्वास्थ्य को खतरे में डाल रहे हैं, बल्कि महंगी दरों पर पूरी तरह फर्जी और अविश्वसनीय जांच रिपोर्ट थमा रहे हैं। क्या किसी को अंदाजा है कि इन गलत रिपोर्टों के आधार पर डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं किसी मरीज के जीवन पर क्या घातक असर डाल सकती हैं?
अधीक्षक की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल
सवाल यह उठता है कि पीएचसी कुदरहा के अधीक्षक की नाक के नीचे यह अवैध कारोबार कैसे फल-फूल रहा है? अस्पताल परिसर में अवैध कब्जे और दलाली के इस नंगे नाच को रोकने में अधीक्षक पूरी तरह नदारद क्यों हैं?
क्या उनकी चुप्पी का कारण इन अवैध सेंटरों से मिलने वाला वह ‘लिफाफा’ है, जो कार्रवाई के नाम पर उनके हाथ बांध देता है? यदि मामला सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही का होता तो इसे सुधारा जा सकता था, लेकिन यदि इसमें आर्थिक सांठगांठ शामिल है, तो यह सीधा-सीधा मरीजों के जीवन के साथ घोर विश्वासघात है।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
सरकारी अस्पताल जनता के भरोसे का केंद्र होता है, जिसे इन दलालों ने ‘कमाई का जरिया’ बना लिया है। यदि उच्चाधिकारियों ने समय रहते कुदरहा पीएचसी में चल रहे इस अवैध पैथोलॉजी सिंडिकेट पर नकेल नहीं कसी, तो भविष्य में किसी बड़ी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता।
बस्ती की जनता और जागरूक नागरिकों का सवाल है— क्या जिला स्वास्थ्य विभाग इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई करेगा, या फिर यह ‘अवैध कमाई का खेल’ इसी तरह बेखौफ जारी रहेगा?
यह लेख कुदरहा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल स्थिति पर एक गंभीर टिप्पणी है। स्थानीय प्रशासन को तुरंत इस मामले का संज्ञान लेते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।




















